राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने आज गोविन्द लोकपर्व हरेला के अवसर पर ‘हरित यज्ञ’ अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
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राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने आज गोविन्द लोकपर्व हरेला के अवसर पर ‘हरित यज्ञ’ अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने आज गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में आयोजित लोकपर्व हरेला के अवसर पर 15 दिवसीय ‘हरित यज्ञ’ अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने तराई भवन परिसर में रुद्राक्ष का पौधा रोपण किया तथा गांधी हॉल में आम की विभिन्न किस्मों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

राज्यपाल ने कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं बल्कि प्रकृति, किसान और मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय ने देश को हरित क्रांति का मार्ग दिखाया था और अब समय आ गया है कि यह संस्थान ‘ग्रीन रिवोल्यूशन 2.0’ का नेतृत्व करे।

उन्होंने कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डेटा विज्ञान, जल संरक्षण, कार्बन प्रबंधन तथा आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर बल देते हुए कहा कि भविष्य की कृषि जलवायु अनुकूल, तकनीक आधारित एवं किसान-केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि उनका प्रत्येक शोध सीधे किसानों तक पहुंचे और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए।

राज्यपाल ने उत्तराखंड की 71 प्रतिशत वन संपदा तथा पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय द्वारा 50 हजार पौधरोपण के संकल्प की सराहना की। उन्होंने कहा कि पौधे लगाना जितना आवश्यक है, उनका संरक्षण उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम में डा. शैलेन्द्र ने अपने संबोधन में कहा कि हरेला भारतीय संस्कृति एवं प्रकृति संरक्षण का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने गौरा देवी, अमृता देवी बिश्नोई तथा चिपको आंदोलन का उल्लेख करते हुए जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का आह्वान किया तथा प्रत्येक नागरिक से कम से कम तीन पौधे लगाकर उनके संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की।

अपने स्वागत उद्बोधन में कुलपति डा. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय देश की हरित क्रांति का जन्म स्थान रहा है और आज भी कृषि अनुसंधान, नवाचार एवं किसान हितैषी तकनीकों के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में हाल के महीनों में ब्रेन 3.0 का आयोजन किया गया जिसमें एलुमनाई सहभागिता तथा कृषि एवं नवाचार आधारित अनेक नई परियोजनाओं की शुरुआत की गई है।

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल द्वारा ड्रैगन फ्रूट की खेती के क्षेत्र में अनुकरणीय एवं उत्कृष्ट कार्य के लिए श्री अनूप मौर्य को प्रशस्ति पत्र एवं रूपये एक लाख पच्चीस हजार की पुरस्कार राशि का चैक प्रदान कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा विश्वविद्यालय के पांच प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों, श्री गुरू इंदर मोहन सिंह, संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, कार्बन सर्कल; श्री एस.के. गौतम, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सरवीर एग्रीटेक प्रा.लि.; श्री मंजुल प्रताप सिंह, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, ओराईजो राईस घर एग्रोवल्ड प्रा.लि.; श्री विजय प्रताप सिंह, संस्थापक, देवलसारी नेचुरल्स एवं श्री रजत वर्धन, संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्कैनेक्स्ट साइंटिफिक टेक्नोलॉजीज प्रा.लि. को सम्मानित किया गया। उन्होंने संपीडित बायोगैस एवं बायो-रिफाइनरी सुविधा, फर्टिगेशन प्रणाली में स्वचालन को बढ़ावा, कार्बन मैपिंग एवं कार्बन क्रेडिट परामर्श साझेदारी तथा विशिष्ट रेडी-टू-ईट कार्यात्मक खाद्य उत्पादों हेतु उन्नत अनुसंधान एवं विकास सुविधा की स्थापना, नवाचार एवं कृषि उद्यमिता केन्द्र की स्थापना जैसी परियोजनाओं पर विश्वविद्यालय के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के अंत में महाप्रबंधक (ऑपरेशन फार्म) डा. अमित भटनागर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक, पंतनगर शाखा ने पौध क्रय हेतु रू. 3 लाख की सहायता राशि तथा पौधों की सुरक्षा के लिए 500 ट्री गार्ड उपलब्ध कराए हैं।

इस अवसर पर कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की कुलसचिव, नियंत्रक, अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारीगण, प्राध्यापक, कर्मचारीगण, विद्यार्थीगण, किसान, पूर्व छात्रगण एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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