मुकेश सिंह तोमर
भारत के त्रासद विभाजन का स्मरण करने के लिए 14 अगस्त को जब विभाजन दिवस मनाने की पहल हुई थी तो कुछ लोगों की ओर से उसका यह कहकर विरोध किया गया था कि बंटवारे के इतने वर्षों बाद इसका कोई औचित्य नहीं, और उस त्रासदी को भूलकर आगे बढ़ने का वक्त है। लेकिन बांग्लादेश में हिन्दूओं के साथ हो रही घटनाएं यह बता रही है कि भारत विभाजन के दंश भुलाए नहीं जा सकते। एक ओर बांग्लादेश के हिन्दू दयनीय दशा में है और दूसरी ओर पाकिस्तान पोषित आंतकवाद भारत को क्षति पहुंचा रहा है। यह सच है कि हमें अंग्रजों की गुलामी से मुक्ति 15 अगस्त 1947 को मिली। परन्तु 14 अगस्त 1947 को भारत विभाजन का दंश एक कभी न भरने वाला घाव की टीस हर भारतवासी महसूस कर रहा है। 15 अगस्त भारत के लिए एक सुंदर ऐतिहासिक घटना थी। 15 अगस्त भारत को भारत विभाजन एक अफसोसजनक दु:खदायी पूर्ण घटना थी।
दुनियां में जब कहीं बड़े पैमाने पर हिंसा होती है तो कुछ फेक फोटो और वीडियो भी आ जाते है। ऐसा ही बांग्लादेश में हिन्दूओं पर हमले को लेकर भी हुआ। इन्हें ढ़ाल बनाकर Hehe माहौल बनाने की हरसंभव कोशिश हुई कि हिन्दूओं पर हमलें की सारी खबरें झूठी है। यह काम तथाकित पैकेट चेकर भी कर रहे थे। उनकी ओर से बनाया जा रहा फर्जी नैरिटिव तब ध्वस्त हो गया, जब अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस हिन्दुओं पर हमलें के खिलाफ बोले।
विश्व के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हुआ था, जब किसी देश का विभाजन हुआ हो, और बड़ी संख्या में उनकी प्रजा की अदला-बदली हुई हो। इससे पहले किसी राष्ट्र पर आक्रमण होता था, वहां सत्ता बदलती थी, साथ ही शासक ही शासक भी बदलता था। यह सब होता था। परन्तु राष्ट्र का विभाजन हुआ हो और फिर प्रजा की अदला-बदली हुई हो। यह पहली बार भारत विभाजन के समय हुआ। इसके लिए भारत ने अपनी भूमि का बंटवारा भी किया और अपने ही लोगों पर अत्याचार होते हुए भी देखा।
हमारे तत्कालीन नेताओं ने उदारता का परिचय देते हुए यह छूट दी कि हिंदुस्तान छोड़कर नए-नए बने पाकिस्तान में जो जाना चाहे, वह जाए और जो नहीं जाना चाहता, वह भारत में भी सुरक्षित रह सकता है। इसके विपरीत भारत भूमि का ही एक टुकड़ा लेकर पाकिस्तान नामक इस्लामिक राष्ट्र घोषित करने वाले कट्टरपंथी नेताओं ने उस भूखंड पर बहुत समय पहले ही रहते चले आए भारतीयों विशेषकर हिन्दुओं और सिखों के साथ मार-काट शुरू कर दी। सांप्रदायिकता मानसिकता और हिन्दुओं के प्रति नफरत चलते ही पाकिस्तान में त्रासदपूर्ण हालात पैदा हो गये।
वहां पर हर काम हिन्दुओं के विरुद्ध किया गया। जिससे मानवता शर्मसार होती गई। पाकिस्तान में हिन्दुओं-सिखों के कत्लेआम के समाचार जब भारत आए तो प्रतिक्रिया स्वरूप यहां भी हिसंक घटनाएं हुई। पाकिस्तान में हिन्दुओं और सिखों को मारा गया। उनकी स्त्रियों-बच्चियों के साथ दर्दनाक अत्याचार किये गए।
आज यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं कि भारत के विभाजन ने मानवता की ही नहीं, बल्कि भारत के विचारों की भी हत्या की थी। किसी दुर्घटना का मानवीय चेतना की अंतिम गहराई पर चले जाना मानव मन की गंभीर विकृति का प्रतीक है। यह भारत का महत्वपूर्ण पक्ष है कि हम उस घटना को भूले नहीं है। सच में नहीं भूलेंगे, तभी हम सांप्रदायिक मानसिकता, उन्माद और आंतकवाद को समझ सकेंगे और जब समझेंगे, तभी भारत उनका समाधान ढूंढ सकेंगा।
